आत्मनिर्भर बिहार के लिए सिविल इंजीनियर प्रशांत कुमार शुभम की सोच |

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आत्मनिर्भर बिहार

आत्मनिर्भर बिहार के लिए सिविल इंजीनियर प्रशांत कुमार शुभम की सोच |

नमस्ते ! बिहार वाइब्स के मेरी सोच मेरा बिहार के इस अभियान में मैं सुमित कुमार आप सभी का स्वागत करता हू। मैंने देखा है कि हम सभी बिहारियों के दिल में बिहार बसता है, और हर कोई बिहार को विकसित, आत्मनिर्भर, बेहतरीन और सभी आधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण देखना चाहते हैं।  इसी कारण से मैं इस अभियान की शुरुआत कर रहा हूँ। प्रत्येक ब्लॉग में आप बिहार के युवा, सामाजिक कार्यकर्ता, कलाकार एवं विभिन्न क्षेत्रों के लोगों द्वारा उनकी सोच को पढ़ेंगे। आज के ब्लॉग में हमारे साथ प्रशांत कुमार शुभम अपनी सोच, अपनी बात हम सभी के बीच रखेंगे।

मैं प्रशांत कुमार शुभम एक सिविल इंजीनियर हूँ | भारत वर्ष के उत्तर भाग में स्थित एक प्रसिद्ध राज्य बिहार का निवासी हूं। इस राज्य की राजधानी पटना है। इस राज्य का गठन 1950 में हुआ लेकिन 1936 में उड़ीसा और तत्पश्चात 2000 में झारखंड से विभाजन के बाद इसने अपने कृषि के दम पर भारत वर्ष में उन्नति की है। हमारे राज्य बिहार की सबसे बड़ी खासियत यह है कि हमारे यहां से भिन्न-भिन्न क्षेत्रों(आई.आई.टी , आई.पी.एस , एस.एस.सी) में सफलता हासिल करने के बाबजूद यहां की सरकार की व्यवस्था के चलते हमारे भाई-संबंघी दुसरे राज्य में मजदूरी करने के लिए बेबस है।

 किसी समय में हमारे राज्य के विभिन्न हिस्सों में बहुत से कारखाने हुआ करते थे जो कि आज हमारे अपने राज्य सरकार की वजह से उन सारे कारखानों में ताले लटके हैं। अगर इतिहास की बात करें तो हमारा राज्य का नाम पुरे भारत वर्ष में विश्वविद्यालय की वजह से प्रसिद्ध हुआ करता था लेकिन आज ऐसा हाल है कि हमारे राज्य के मेघावी छात्र-छात्रौं को दुसरे राज्य जाकर विद्या प्राप्त करना पड़ रहा है और कुछ अपने आर्थिक तंगी के चलते अपने सपनों का गला घोंट देते हैं। ये हमारे राज्य की सबसे बड़ी कमजोरी को दिखाता है जिसके चलते हमारे राज्य की ख्याती भारत वर्ष में कम होती जा रही है।

आज भी पूरे भारतवर्ष में बिहारियों को अलग नजरिए से देखा जाता है लेकिन इसके बावजूद हमारे राज्य बिहार में ऐसी कई खुबियां है जिसके चलते मुझे अपने बिहार राज्य से प्यार है। इतिहास गवाह है कि जब जब खुद पर या अन्य किसी पर कोई समस्या आई तो सबसे पहले हमारा राज्य आगे होता है और यही वजह है कि मुझे अपने राज्य से बहुत स्नेह और लगाव है । अगर इस राज्य की खुबियां पर प्रकाश डाला जाए तो दिन खत्म हो जाए लेकिन खुबियां नहीं होगी । फिर भी आज मैं आपको अपने राज्य की सबसे बड़ी खुबियां से रूबरू कराता हूं।

हमारा राज्य बिहार बहुत से महापुरुषों का जन्मस्थल रह चुका है उनमें से, हमारे देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद से लेकर महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह जी का जन्मस्थल भी हमारा राज्य बिहार हीं है। हमारे राज्य बिहार का एक प्रमुख खुबियां ये है कि हम अपने आपको “हम” से संबोधित करते है क्योंकि हम लोग एक-दूसरे पर भरोसा करते और एकता में विश्वास रखते हैं। हमारे राज्य बिहार में हिम्मतवाले और प्यार की कमी नहीं है क्योंकि हम जो एक बार ठान लेते वो मरते दम तक पुरा करने का जूनून रखते और इस बात का सबसे बड़ा गवाह हमारे राज्य का एक ऐसा शख्स जो एक विशालकाय पर्वत को बीचों बीच काट कर एक रास्ता बना दिया। और उस शख्स का नाम था दशरथ मांझी। इनका एक कथन आज भी हमारे युवा पीढ़ी को अपने सपनों को पूरा करने में मदद करती है और वो कथन में है कि ” जब तक तोड़ेंगे नहीं तब तक छोड़ेंगें नहीं”। ये सब वो बातें है जिसके चलते मुझे अपने राज्य से बाहर प्यार है।हमारे बिहार सरकार की सबसे बड़ी लापरवाही की व्याख्यान हम इस बात से लगा सकते है कि लगभग हर वर्ष हमारे राज्य का एक बड़ा हिस्सा बाढ़ से प्रभावित होता तो उसी समय दुसरा हिस्सा सुखा , भुखमरी से प्रभावित होता है। लेकिन हमारे बिहार सरकार ने आज तक इस समस्या के समाधान हेतु कुछ उपाय नहीं किए। ये सब बातें हमारे बिहार राज्य के कमजोर पक्ष को दर्शाता हैं। अब हम अपने राज्य के उस अंग पर प्रकाश डालते हैं जो कि हर बिहारी के आंखों का सपना होता है “हमारा आत्मनिर्भर बिहार”।
आत्मनिर्भर बिहार” यह शब्द सुनते ही प्रत्येक बिहारी को उतना ही सुकून मिलता है जितना सुकून एक बेटे को मां का आंचल मिलने पर होता है।
आत्मनिर्भर बिहार” का अर्थ बोला जाए तो हर बिहारी के बचपन का वो सपना जो हमारे बिहार राज्य में ही हो जैसे यहां मेघावी छात्र तो हैं लेकिन उनके प्रतिभा को निखारने के लिए कोई अच्छा विश्वविद्यालय नहीं है। यहां मेहनती मजदूर है लेकिन उनके लिए कोई काम का साधन नहीं है। और हमारे राज्य की सबसे बड़ी विडंबना ये है कि हर साल सरकार कोष से सड़क, कृषि, गरीबी और तरह-तरह के योजनाओं के लिए धन राशि मिलती तो हैं लेकिन वो सारे योजनाओं अखबार के पहली पृष्ठ से लेकर समाचार के मुख्य प्रसारण बनकर रह जाती है। अगर हमें अपने राज्य को “आत्मनिर्भर बिहार” बनाना है तो सबसे पहले हमें अपने राज्य सरकार की बागडोर एक ऐसे व्यक्ति के हाथ में सौंपना चाहिए जो कि लगभग हमारे सारे समस्याओं से रूबरू हो और उस पर कार्य करने के लिए तत्पर हो। और हम सबको मिलकर हमें भी एक कदम उठानी चाहिए कि जब तक हम अपने राज्य के सपने को साकार न करें तब तक हम में से कोई रुकें नहीं कोई झुकें नहीं। तभी हमारा “आत्मनिर्भर बिहार” का सपना साकार होगा।
धन्यवाद !!

 
 

2 COMMENTS

  1. “आत्म निर्भर बिहार” यह शीर्षक अपने आप में ही पूर्ण है, ये बताने के लिए कि हम बिहारवासी अपने बिहार को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कितना तत्पर हैं।लेकिन दशको से राजनीतिक विध्वंस के चलते पर्याप्त संसाधनों व विवेक से परिपूर्ण होकर भी आज तक अपूर्ण है।हमसभी अपने अंतर्मन से तो आत्मनिर्भर हो चुके हैं, अब वक्त आ चुका है उनसभी को आइना दिखाने और उनके कर्तव्य का एहसास दिलाने का जिन्होंने अपने तुच्छय व घटिया राजनीतिक फायदे के लिए हमारे गौरवशाली बिहार का ये हाल किया है।
    आप “बिहार वाइवस” को और मेरे प्यारे मित्र प्रशांत शुभम को इस नेक विचार और प्रयास केलिए बहुत-बहुत धन्यावाद।

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