गवई इश्क़​

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गवई इश्क़

तू गाय, हम बछरू।
तू पगहा , हम घुंघरू।

तू पावा, हम पाटी।
तू बिलायती, हम खाटी।

तू भात, हम चोखा।
तू बियाह , हम रोका।

तू रोग , हम रोगी।
तू सुख, हम भोगी।

तू जिला, हम जवार।
तू घर , हम दुवार ।

तू इन्हना, हम बाती।
तू धड़कन, हम छाती।

तू खाना, हम पानी।
तू पुआर, हम शानी।

तू बबुनी, हम बाचा।
तू झूठी, हम साचा।

तू साग, हम सतुआ।
तू पाकल, हम भतूआ।
– अखिल प्रियदर्शी 

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