आत्मनिर्भर बिहार के लिए बिहारी युवा राजा रवि की सोच |

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Raja Ravi Bihar vibes

आत्मनिर्भर बिहार के लिए बिहारी युवा राजा रवि की सोच |​

नमस्ते ! बिहार वाइब्स के मेरी सोच मेरा बिहार के इस अभियान में मैं सुमित कुमार आप सभी का स्वागत करता हू। मैंने देखा है कि हम सभी बिहारियों के दिल में बिहार बसता है, और हर कोई बिहार को विकसित, आत्मनिर्भर, बेहतरीन और सभी आधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण देखना चाहते हैं।  इसी कारण से मैं इस अभियान की शुरुआत कर रहा हूँ। प्रत्येक ब्लॉग में आप बिहार के युवा, सामाजिक कार्यकर्ता, कलाकार एवं विभिन्न क्षेत्रों के लोगों द्वारा उनकी सोच को पढ़ेंगे। आज के पहले ब्लॉग में हमारे साथ पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ (18-19) के संयुक्त सचिव एवं कोशी शिखर सम्मलेन के महानिदेशक राजा रवि अपनी सोच, अपनी बात हम सभी के बीच रखेंगे।

मैं राजा रवि, छात्रनेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता 2018-19 के सत्र के लिए मैं पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ में संयुक्त सचिव निर्वाचित हुआ । मेरा हमेशा से यह मानना रहा है कि राजनीति सत्ता प्राप्ति का साधन नहीं बल्कि जनसेवा का माध्यम होना चाहिए और इसलिए सामाजिक मोर्चे पर जब और जहाँ मुझे मौका मिला मैं लोगों की मदद और सेवा के लिए हमेशा ही मौजूद रहा ।

 

मैं बिहार से आता हूँ और इसलिए इस राज्य के बारे में सोचना हमेशा ही मेरे चिंतन की प्राथमिकता रही है। बिहार न सिर्फ मेरा घर है बल्कि यहाँ के श्रेष्ठ उदाहरणों से मुझे कई सारी सीख भी मिली है। दशरथ मांझी का पुरुषार्थ, चाणक्य का नीतिशास्त्र, बुद्ध का अध्यात्म, नालंदा का ज्ञान.. इन सब ने मुझे बहुत ही प्रेरित किया है।

जहाँ तक “आत्मनिर्भर बिहार” का प्रश्न है, मुझे गांधी जी की एक पुस्तक “ग्राम स्वराज्य” का ध्यान आ रहा है। उनका मानना था कि एक गाँव अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति में खुद ही सक्षम होना चाहिए। हमारे यहाँ ग्रामीण क्षेत्र बहुतायत में हैं और इसलिए आत्मनिर्भरता की परिकल्पना वहीं से साकार होगी। ऐसे कई बिंदु हैं जिसपर चर्चाएं होती हैं, समितियां बनती हैं लेकिन सब बेनतीजा ही रहती हैं। आज आवश्यकता है उन सभी संकल्पों को साकार करने की।

प्रतिभा की कमी नहीं है लेकिन कमी है साधन और संसाधन की। विद्यार्थी हैं, बहुत तेज हैं लेकिन ढंग के कॉलेज दूर की बात, ठीक-ठाक स्कूल भी नहीं हैं। जीतोड़ परिश्रम करने वाले मजदूर हैं, वे मजदूर जो पूरे भारत की फैक्ट्री चलाते हैं लेकिन अपने ही राज्य में उनके लिए उद्योग नहीं है। अपनी मेहनत से धरती क्या आसमान का सीना चीर देने की हिम्मत रखने वाले किसान हैं, पंजाब में बुआई-कटाई करते हैं लेकिन अपने ही राज्य में खेती करने के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। कितने ही होनहार इंजीनियर हैं लेकिन उनके लिए कोई प्लेटफॉर्म नहीं है। ढंग के अस्पताल नहीं हैं। नजर आती है तो सिर्फ सरकारी अकर्मण्यता।

मेरा मानना है कि इन सभी मामलों में सार्थक कदम बढ़ाए जाने से ही बिहार पुनः उसी विराट गौरव को प्राप्त करेगा जो अतीत के पन्नों में सिमट कर रह गए हैं और आत्मनिर्भर बिहार का हमारा स्वप्न एवं संकल्प साकार होगा।

धन्यवाद !!

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