बिहार की ऐतिहासिक गाथा

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बिहार की ऐतिहासिक गाथा

बिहार की ऐतिहासिक गाथा

बिहार की ऐतिहासिक गाथा
     वर्तमान मे हमारे देश भारत मे 28 राज्य हैं जिनकी अपनी अलग अलग विशेषताएं हैं किसी भी राज्य की संस्कृति एंव विशेषता किसी अन्य राज्यों की तुलना मे कम नहीं है। हर एक राज्य की अपनी अलग अलग विशेषताएंहैं। इन्ही राज्यों मे से एक है बिहार जिसकी सभ्यता एंव संस्कृति का बखान वेदों मे भी वर्णित है।
  • बिहार के इतिहास को हम 3 भागों मे बाटेंगे ।
1. प्राचीन बिहार
2. मध्यकालीन बिहार
3. आधुनिक बिहार

                      प्राचीन बिहार

     बिहार का प्राचीन नाम मगध था , प्राचीन काल मे भारत 16 महाजनपदों मे बटा था । इन 16 महाजनपदों मे से 3 महाजनपद बिहार मे ही थे । ये थे मगध, अंग एंव वज्जिसंघ ।  बिहार मे स्थित इन 3 महाजनपदों मे से सबसे बड़ा जनपद मगध था । मगध की राजधानी गृहवृज थी फिर राजगीर और अंत मे पाटलीपुत्र हुई । अंग की राजधानी चम्पा थी एंव वज्जिसंघ की राजधानी वैशाली थी। पटना,नालंदा और गया का भाग प्रारंभ मे मगध के नाम से विकसित हुआ , भागलपुर और मुंगेर का छेत्र अंग के नाम से जाना जाता था तथा उत्तर बिहार मे मुजज़फ़रपुर और वैशाली का छेत्र वजजीसङ्घ के नाम से जाना जाता था। वज्जिसंघ 8 सदस्यों से मिल कर बना था जिसमे सबसे महत्वपूर्ण लिछवि था। लिछवि मे ही दुनिया का सबसे पहला गणतंत्र लागू हुआ था। मगध भारत के सभी महाजनपदों मे से सबसे महत्वपूर्ण जनपद था क्यूंकि इसका विस्तार सिर्फ बिहार तक ही नहीं बल्कि पूरे भारत मे हुआ तथा इसने अपना वर्चस्व पूरे भारत पे कायम किया। मगध की स्थापना बृहदरथ ने की थी, हालांकि एक क्रमगत वंश परंपरा की स्थापना हर्यक वंश से हुई । मगध का पहला स्थापित वंश हर्यक वंश था , इसके बाद शिशुनाग वंश , नन्द वंश, मौर्य वंश, गुप्त वंश और फिर पाल वंश के शासकों ने शासन किया । हर्यक वंश की स्थापना 544 ईस्वी पूर्व बिंबिसार के द्वारा की गई । बिंबिसार के बाद उसके पुत्र आजतशत्रु ने मगध पे शासन किया, आजतशत्रु ने अपने पिता की हत्या कर गद्दी को अपने नाम किया था। ठीक उसी प्रकार आजतशत्रु के पुत्र उदयन ने भी अपने पिता की हत्या कर मगध की गद्दी को अपने नाम किया था। वर्तमान मे पटना के नाम से जाने जानेवाले पातलीपुत्र की स्थापना उद्यन ने ही की थी। हर्यक वंश की समाप्ति के बाद नागदशक  की हत्या करके शिशुनाग ने शिशुनाग वंश की स्थापना की। शिशुनाग के बाद कालाशोक गद्दी पर बैठा। शिशुनाग वंश के बाद नन्द वंश का उद्भव हुआ जिसकी स्थापना महापदमनन्द ने की थी। ये एक शक्तिशाली वंश के रूप मे विकसित हुआ। इस वंश के अंतिम शासक घनानन्द हुए । कहा जाता है की इसी घनानाद के दरबार मे चाणक्य रहा करते थे किन्तु जब उन्हे अपमानित किया गया तब उन्होंने दरबार को छोड़ दिया तथा चन्द्रगुप्त मौर्य की मदद से घनानन्द की हत्या कर  नन्द वंश का विनाश किया और  मौर्य वंश की स्थापना की। मौर्य वंश की स्थापना चन्द्रगुप्त मौर्य के द्वारा की गई ,चन्द्रगुप्त मौर्य के पुत्र बिन्दुसार थे। चन्द्रगुप्त मौर्य ने पाटलीपुत्र को मगध की राजधानी के रूप मे स्थापित किया, चन्द्रगुप्त मौर्य ने महान शासक सिकंदर के सेनापति सेल्यूकस निकेटर से युद्ध किया जिसके जरिए उन्होंने मेगास्थनीज को प्राप्त किया,मेगास्थनीज एक राजदूत के रूप मे चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार मे आया जिसने इंडिका की रचना की। चाणक्य ने अर्थशास्त्र नामक  पुस्तक की रचना की थी।  मौर्य वंश के शासकों मे बिन्दुसार तथा सम्राट  अशोक जैसे महान शासक भी शामिल थे। कलिंग के भयंकर युद्ध के बाद सम्राट अशोक ने हिंसा का मार्ग छोड़ दिया। कहा जाता है की कलिंग के भयंकर युद्ध मे इतना रक्तपात हुआ था की जिसे देखकर अशोक को युद्ध तथा हिंसा के नाम से भी घृणा हो गई उस भीषण रक्तपात को देखकर सम्राट अशोक का भी हृदय कांप उठा था, इस युद्ध के बाद उन्होंने हिंसा का मार्ग छोड़ दिया तथा बुद्ध के धर्म को अपना कर उनके मार्ग पर चल पड़े। मौर्य वंश के अंतिम शासक वृहदत की हत्या कर पूषयमित्र शुंग ने शुंग वंश की स्थापना की। शुंग वंश के बाद मगध पर कण्व वंश, कुषाण वंश, गुप्त वंश,वर्धन वंश और फिर पाल वंश के शासकों का शासन रहा। गुप्त वंश के संस्थापक तथा पहले शासक श्रीगुप्त थे इनके बाद घाटोतकच फिर चन्द्रगुप्तप्रथम ने शासन किया ,चंद्रगुप्ता गुप्त वंशावली मे पहले स्वतंत्र शासक थे ,इन्होंने महारजाधिराज की उपाधि धारण की थी। चंद्रगुप्तप्रथम के दरबार मे नवरत्नों की एक मंडली रहती थी जिन्हे नवरत्न कहा जाता था इन नवरत्नों मे से एक महान कवि कालिदास थे। कालिदास संस्कृत के महान कवि और नाटककार थे इनके द्वारा रचित सभी रचनाओं मे से एक अभिज्ञान शकुंतलम है जिसका सबसे पहले अनुवाद यूरोपीय भाषा मे हुआ था। चंद्रगुप्तप्रथम के बाद उनका पुत्र समुन्द्रगुप्त गद्दी पर बैठा,समुन्द्रगुप्त सम्पूर्ण प्राचीन इतिहास के महानतम शासकों मे से एक था। इन्हे परक्रमांक कहा गया है। समुन्द्रगुप्त के शासन काल को गुप्तकाल का स्वर्णिम काल कहा जाता ह। इस साम्राज्य की राजधानी पटलीपुत्र थी। समुन्द्रगुप्त ने महाराजाधिराज की उपाधि धारण की। विसेन्ट ने इन्हे नेपोलियन की उपाधि दी। समुन्द्रगुप्त के बाद रामगुप्त,चंद्रगुप्तविक्रमादित्य,कुमारगुप्त ,स्कंदगुप्त, नरसिंहगुप्त बालादित्य ,कुमारगुप्त 2, इत्यादि राजाओं ने शासन किया। बौद्ध धर्म से संबंधित पहला विश्वविध्यालय नालंदा की स्थापना कुमारगुप्त ने की थी।गुप्त वंश के बाद वर्धन वंश और फिर पाल वंश का शासन हुआ। पल वंश के संस्थापक गोपाल थे। इन्होंने बिहार के बिहार शरीफ मे ओदन्तपुरी विश्वविध्यालय की स्थापना की। गोपाल के पुत्र धर्मपाल ने अपने शासनकाल मे विक्रमशीला विश्वविध्यालय की स्थापना की जो बिहार के भागलपुर मे स्थित है।
       563 ईस्वी पूर्व नेपाल केलुमबनी नामक सुंदरवन मे जन्मे  गौतम  को ज्ञान की प्राप्ति बिहार के बोध गया जिले मे हुई थी जिसके बाद वो सिद्धार्थ गौतम से भगवान बुद्ध बने तथा लगभग 80 वर्ष की उम्र मे बिहार के कुशीनगर मे उन्हे निर्वाण की प्राप्ति हुई। महात्मा बुद्ध की कर्म भूमि होने की वजह से यहा अत्यधिक बौद्ध भिकछुओं का वास था , बौद्ध भिकछुओं के निवास स्थान को विहार कहा जाता था अतः अत्यधिक विहार होने के कारण इस जगह का नाम विहार पड़ा जोकि बाद मे विहार से बिहार मे परिवर्तित हो गया। जैन धर्म के 24 वे तीर्थकर महावीर स्वामी का जन्म भी बिहार के कुंडलग्राम मे हुआ तथा निर्वाण की प्राप्ति भी बिहार मे स्थित पावापुरी मे हुई। जैन धर्म के संस्थापक पार्श्वनाथ थे परंतु महावीर को इस धर्म का वास्तविक संस्थापक माना जाता है इसका मुख्य कारण ये है की जैन धर्म के सभी तीर्थकरों मे महावीर सबसे पराक्रमी एंव सफल तीर्थकर हुए अतः इन्हे जैन धर्म का वास्तविक संस्थापक माना जाता है । इस धर्म के 23वे तीर्थकर ऋषभ देव थे।
     मुख्य रूप से बिहार से शुरू इन दोनों धर्मों ने सिर्फ भारत मे ही नहीं बल्कि लगभग पूरे विश्व मे अपना विस्तार किया। वर्तमान मे बिहार मे बौद्ध तथा जैन धर्म के कई ऐतिहासिक स्मारक स्थित हैं। आस्था से जुड़े इन ऐतिहासिक स्मारकों को देखने हर दिन दुनिया के कोने कोने से लोग आया करते हैं।

   

प्राचीन बिहार
      महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण मे वर्णित भगवान राम की पत्नी देवी सीता की जन्म स्थली भी बिहार ही है, कहा जाता है की देवी सीता ने अपने दोनों बेटों लव एवं कुश को यही जन्म दिया था तथा इनकी शिक्षा दीक्षा भी यही हुई थी।बिहार का प्रथम वर्णन शतपथ ब्राह्मण ग्रंथ मे मिलता है, ऋग्वेद मे बिहार के लिए कीकट शब्द का प्रयोग किया गया है तथा यहाँ रहने वाले लोगों के लिए व्रात्य शब्द का प्रयोग हुआ है जिसका अर्थ पापी होता है इसका कारण ये है की वैदिक सभ्यता का विस्तार प्रारंभ मे बिहार मे नहीं हुआ था जिसकी वजह से इस छेत्र तथा यहाँ रहने वाले व्यतियों को हीन भवना से देखा गया तथा इस छेत्र को कीकट और यहाँ के लोगों को व्रात्य कहा गया। यजुर्वेद मे बिहार मे एक विदेह राज्य का वर्णन मिलता है जिसकी स्थापना निमिविदेह नामक राजा ने की थी जो इच्छवाकू वंश के थे। बाद मे 25 वें राजा के रूप मे राजा जनक हुए जिनकी पुत्री सीता थीं, रामायण मे विदेह छेत्र का वर्णन है जिसे आज मिथिला के नाम से जाना जाता है।

                     मध्यकालीन बिहार

      बिहार मे मध्यकालीन युग की शुरुवात तुर्कों के आक्रमण के साथ होता है। सामान्यतः ऐसा मन जाता है की बिहार मे पहला आक्रमण तुर्क शासक बख्तियार खिलजी ने किया था परंतु उसके आक्रमण से पहले भी बिहार मे तुर्कों का आवागमन था। 1197-98 के पश्चात बख्तियार खिलजी ने मगध मे पहला आक्रमण किया और लूट। इसके बाद उसने बिहार शरीफ के ओदन्तपुरी पर आक्रमण किया। ओदन्तपूरी को लूटने के बाद उसने नालंदा विश्वविध्यालय को जलाकर बर्बाद कर दिया। इस दौरान उसने आधुनिक बख्तियारपुर शहर को बसाया और इस दौरान बिहारशरीफ तुर्कों के केंद्र के रूप मे उभरा। बौद्ध मठों की बहुलता के कारण तुर्कों ने इसे विहारों का प्रदेश कहा। बौद्ध भिक्षुओं के निवास करने के स्थान को विहार कहते हैं अतः तुर्कों ने इसे विहार नाम दिया जो बाद मे बिहार हो गया। बिहार शब्द विहार का अपभ्रंश रूप है। 12 वीं शताब्दी के अंत मे नालंदा और ओदन्तपुरी के नोटक मे स्थित अनेक बौद्ध विहारों की वजह से मुसलमान शासकों ने इस प्रदेश का नामकरण बिहार कर दिया। बख्तियार खिलजी ने 1200 मे नालंदा और ओदन्तपुरी विश्वविद्यालयों को नष्ट कर दिया बख्तियार खिलजी के बीमार पड़ने के दौरान अलिमर्दन खिलजी ने उसकी हत्या कर दी। उसका शव बिहार शरीफ के इमादपुर मुहल्ले मे दफना दिया गया। 1206 मे बख्तियार खिलजी के मरने के बाद अलिमर्दन बिहार का कार्यकारी शासक बना। जब बख्तियार खिलजी ने बिहार पर आक्रमण किया था तब बिहार मे कर्णाट वंश का शासन था। कर्णाट वंश के शासक नान्यदेव थे। बख्तियार खिलजी के आक्रमण के समय बिहार के शासक नरसिंहदेव थे। नरसिंहदेव के द्वारा बख्तियार खिलजी को नज़राना पेश किया गया जिसकी वजह से बख्तियार खिलजी ने उन्हे शासन करने दिया। गायसुद्दीन तुगलक के द्वारा बंगाल विजय कर लौटने के दौरान बिहार के शासक हरीसिंह देव थे। गायसुद्दीन तुगलक ने इन्हे सत्ता से हटा दिया और हरीसिंह देव भागकर नेपाल चले गए।  अतः इस प्रकार बिहार मे कर्णाट वंश का शासन खत्म हुआ। कर्णाट वंश की राजधानी नेपाल से सटा सिमरावगढ़ था।सल्तनत काल मे गायसुद्दीन ही पहला शासक था जिसने पूर्ण रूप से बिहार को अपने कब्जे मे ले लिया था। गायसुद्दीन के बाद बिहार मे अफगनों का शासन रहा। अफगनों के बाद बिहार मे मुगल शासन स्थापित हुआ। मुगल कल मे अकंबर ने बिहार के भागलपुर मे 10000 आम के पेड़ लगवाएं जिसे लखीबाग़ के नाम से जाना जाता है। मुगलों के बाद बिहार मे यूरोपीय आए फिर बिहार सहित पूरे देश मे ब्रिटिश साम्राज्य की हुकूमत शुरू ह
मध्यकालीन बिहार

                      आधुनिक बिहार

       ब्रिटिश शासन काल के दौरान देश मे पहला सत्याग्रह आंदोलन बिहार से ही शुरू हुआ। बिहार के पश्चिम चंपारण जिले से महात्मा गांधी ने अंग्रेजों के खिलाफ देश का पहला सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया। आधुनिक बिहार का आधुनिक काल लगभग 1707 ईस्वी से शुरू होता है। 1707 ईस्वी मे औरंगजेब की मृत्यु के बाद राजकुमार अजीम-ए-शान बिहार का बादशाह बना। 1732 ईस्वी मे बिहार का नवाब नजीम को बनाया गया। आधुनिक बिहार मे सिक्ख और इस्लाम धर्म का फैलाव उनके संतों एवं धर्मगुरुओं के द्वारा हुआ। सिक्खों के 10वें गुरु गुरु गोविंद सिंह का जन्म बिहार के पटना मे 26 दिसम्बर 1666 मे हुआ। सिक्खों के 9वें गुरु, गुरु तेगबहादुर का बिहार मे आगमन 17वीं शताब्दी मे हुआ।
       बिहार मे सूफी संतों का आगमन हुआ तथा उन्होंने यह इस्लाम धर्म का प्रचार किया। बिहार मे सर्वाधिक महत्वपूर्ण सूफी सिलसिलों मे फिरदौसी सबसे प्रमुख सिलसिला था। मुगलकालीन साम्राज्य मे बिहार सबसे महत्वपूर्ण सूबा था। यहाँ से शोर का व्यापार होता था अतः पटना मुगल साम्राज्य का दूसरा सबसे बड़ा नगर और उत्तर भारत का सबसे बड़ा एवं महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र था। बिहार मे सबसे पहले पुर्तगाली आए ब्रिटिश व्यापारियों द्वारा पटना के आलमगंज मे व्यापारिक केंद्र खोला गया। 1757 से लेकर 1758 तक बिहार मे अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध होता रहा। 1857 के विद्रोह मे बिहार के वीर कुँवर सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम मे बिहार की एक अहम भूमिका रही है |

 

आधुनिक बिहार

बिहार मे स्थित कुछ महत्वपूर्ण स्थान एवं स्मारक।

  • औरंगाबाद : देवार्क सूर्य मंदिर
  • अंग महाजनपद : प्राचीन भारत के 16 महाजनपदों मे से एक।
  • जमुई : बिहार का प्रमुख जैन तीर्थ स्थल 
  • दरभंगा : रामयणकाल मे मिथिला के नाम से जाना जाता था 
  • पटना : मेगास्थनीज के द्वारा अपनी पुस्तिका“ इंडिका” मे वर्णित
  • बक्सर : प्राचीन काल मे व्याघ्रसर नाम से प्रसिद्ध
  • वैशाली : विश्व के प्राचीनतम एवं सर्वप्रथम गणतंत्र के रूप मे स्थापित
  •  मुंगेर : महाभारत के समय मोदगिरी के नाम से जाना जाता था
  • सीतामढ़ी : देवी सीता की जन्मस्थली के रूप मे पुरानो मे वर्णित

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