मज़दूर भी एक इंसान है |

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मजदूर भी एक इंसान है

जी हां मज़दूर भी एक इंसान है उसका भी एक परिवार है|अपने परिवार का पेट पालने के लिए बच्चों को पढ़ाने के लिए बिहार से लोग दिल्ली मुंबई देश के बड़े बड़े शहरों में जाते हैं| मेहनत करते है खून पसीना बहाते है, कभी कभी तो चोट लग जाती है, लेकिन उस वक्त भी उनको काम ही याद रहता है| दर्द याद नही रहता वो हक़ और ईमानदारी से काम करते हैं,लेकिन आज जब कोरोना कहर पूरी दुनिया में बरस रहा है| तब हमारी देश की सरकारे कोरोना को भगाने का काम तो कर रही है लेकिन अपने घर से दूर किसी बड़े शहर में फँसे हुएं हमारे गरीब मज़दूरों को उनके घर तक पहुँचाने काम नही कर रही है| मज़दूर बेबस हो कर बड़े शहरों से अपने गाँव आपने घर के लिए पैदल ही चलने पे मज़बूर हैं| वही जब किसी बिधायक किसी मंत्री किसी अमीर बाप का बेटा कहीं फँसा होता है तो एयरप्लेन हैलीकॉप्टर या कार से उसको घर पहुँचाया जाता है| लेकिन सरकार के पास मज़दूरों को घर तक पहुँचाने के लिए चंद बसो का भी इंतजाम नही है|

हमने अपने आँखों से देखा है साहब मज़दूर जब शहर से गाँव लौट रहे थे उनके पावँ फूल हुए थे छाले पर गए थे देख कर ऑफ़सोस भी लग रहा था और गुस्सा भी आ रहा था सराकर पे ये सरकार सिर्फ अमीरों के लिए सोचती है,गरीब मज़दूरों के लिए नही, पता है आपको आज भी हमारे छात्र हमारे लोग कोटा में फँसे हुएं लेकिन हमारे बिहार सरकार के कानों पे जुह्न भी नही रेंग रही है वहीं किसी बिधायक का बेटा फँसा था उसे ac कार से घर लाया जाता है लेकिन वँहा फँसे लोगो को छोड़ दिया जाता है जानते है क्यू क्योंकि वँहा बाकी फँसे लोग मंत्री या बिधायक के बेटे भतीजे नही है| मैं सरकार से बस यही पूछना चाहूंगा कि क्या बिधायक मंत्री या अमीर लोग के बेटे परिवार ही इंसान है क्या वही इस देश के नागरिक है क्या मज़दूर इंसान नही? क्या मज़दूर इस देश के नागरिक नही हैं? सवाल तो बहुत है हमारी सरकार से लेकिन सरकार के पास कोई जबाब नही है,मैं सरकार को बताना चाहता हूँ कि देश नीव हमारे मज़दूर,किसान, सैनिक,डॉक्टर हैं ना कि कोई मंत्री बिधायक|

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