No words for Headline

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मेरे प्यारे सुशांत,

हां पता हैं तुम मुझे नहीं जानते, लेकिन मैं तुम्हारे अंदर के मानव को भी जानता हूं, तो काई पो चे के ईशान को भी, साथ ही साथ छिछोरे अन्नी को भी और हर गम को अपनी मस्ती में उड़ा देने वाला Manny को भी। तुम्हारे हर के रूप में सिर्फ मैंने ही नहीं, सभी ने अपना एक झलक देखा हैं और आगे भी शायद देखते रहेंगे।

मेरा एक ख़्वाब था, ख़्वाब तुमसे मिलने का, तुम्हारे साथ एक फोटो लेने का। लेकिन अब वो ख़्वाब सिर्फ एक ख़्वाब बन कर ही रह गया। कोई ना, इस दुनिया में ना सही, दूसरी दुनिया में शायद मुलाकात मुकम्मल हो।

अब तुम नहीं हो साथ हमारे, ऐसा लगता है कि हमारे हिस्से का एक टुकड़ा टूट कर कहीं गिर गया हैं। पता हैं, बहुत ढूंढा उसे, मिलता है नहीं। बस कानों में एक ही आवाज सुनाई देती हैं, “तुम ना हुए, मेरे तो क्या, मैं तुम्हारा, मैं तुम्हारा रहा”।

तुम्हारा चाहने वाला
मेरे अंदर का सुशांत

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