कहानी नए बिहार की |

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कहानी नए बिहार की​

कहानी नए बिहार की

आइये आज हम बात करते हैं, बिहार की। बिहार एक ऐसा राज्य है, जँहा बहुत बड़े बड़े विद्वान जन्में हैं। यँहा भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद की जन्मभूमि है, यँहा हिंदी के प्रमुख लेखक औऱ वीर रस के कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का जन्मभूमि है। यँहा पहाड़ो का सीना चीर कर रास्ता बनाने वाले माउंटेन मैन दशरथ मांझी का जन्मभूमि है, औऱ भी बहुत महत्वपूर्ण लोगो का यँहा जन्मभूमि है, लेकिन ऑफ़सोस बिहार आज भी एक पिछड़ा राज्य है, जिसका मुख्य कारण है ग़रीबी, भुखमरी और बेरोजगारी।

बेच देते हैं वोट अधिकार

बिहार सियासतदानों को तब याद आता जब चुनाव होता है, बाकी दिन बिहारी मरे या जियें सियासतदानों को कोई फर्क नही पड़ता, ग़लती सियासतदानों की नही बल्कि ग़लती हम बिहारियों की है, हम ही चंद पैसे के लिए अपना अधिकार अपना वोट बेच देते हैं। हम बेचें भी क्यूँ नही, हम भूखे मर रहे हैं। हमारे पास रोजगार नही है,खाने के लाले परे हैं,अगर इंसान को भूख लगी हो और कोई खाने के बदले कुछ माँग रहा तो इंसान दे देता है, क्योंकि इंसान को अपनी पेट की भूख मिटानी है,और ये बात सिसायत दान खूब अच्छी तरह से समझतें हैं,और इसका फायदा उठाते हैं।

बिहारी युवा हैं आत्म निर्भर

बिहार के युवा मेहनत कर के पढ़ाई करते है। पापा के साथ काम करते हैं,सब्जी बेचते हैं अंडा बेचते हैं,साइकिल का पँचर बनाते हैं, लेकिन पढ़ाई नही छोड़ते। बिहार के युवा सबसे ज़्यादा नम्बर लाते हैं। टॉप करते हैं, बिहार के युवा सरकार के जॉब के बहाली का इंतेजार नही करते बल्कि सुखी रोटी खा कर खुद के दम पर पढ़ाई कर के IAS, IPS बनते हैं,और बिहार का नाम रौशन करते हैं। 

बिहार है बाढ़ से परेशान

आज लगभग पूरा बिहार बाढ़ग्रस्त है। पूरा बिहार डूबा हुआ है। बाढ़ में,कई घर बह गए कई घर गिर गए लोग रोड पे सोने पे मज़बूर हैं। खाने पीने के लिये उनके पास कुछ नही है,बच्चे रो रहे हैं भूखे पेट,और हमारे बिहार के सियासत दान अपनी राजनीति चमकाने में लगे हुए हैं। पार्टी का प्रचार करने में लगे हुए हैं,चुनाव की तैयारियां करने में जुटे हुए हैं,मुझे ये कहने में बिल्कुल संकोच नही कि बिहार के सियासत दान कुछ नही कर रहे हैं बिहार के लिए, आज जनता की मदद खुद जनता ही कर रही है। आज जनता बाढ़ग्रस्त नही हैं वो बाढ़ग्रस्त लोगो कि मदद कर रहे हैं। इसमे ज़्यादा बिहार के युवा मदद कर रहे हैं चँदा इकट्ठा कर के।

© इरसाद आलम शिबू & बिहार वाइब्स 

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