जानिए बिहार में डिजिटल मीडिया को नई ऊंचाई देने वाले युवा पत्रकार उत्कर्ष सिंह की सफलता की कहानी

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Success Story of Bihar Journalist Utkarsh Singh

पटना : पूरी दुनिया के साथ-साथ अब बिहार में भी डिजिटल मीडिया की धमक तेजी से देखने को मिल रही है।देश के अन्य शहरों की तरह ही बिहार में भी अब हर दिन नए डिजिटल प्लेटफॉर्म की शुरुआत हो रही है, लेकिन, क्या आपको पता है बिहार के डिजिटल मीडिया के शरुआती दिन कितने मुश्किलों भरे थे। जब बिहार में डिजिटल मीडिया की शुरुआत हुई तो जो भी लोग इससे जुड़े थे।उन्हें किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा, मतलब बिहार में डिजिटल मीडिया की यात्रा कैसी रही, क्या लोगों ने डिजिटल मीडिया का यहां आते ही इसे स्वीकार करना शुरू कर दिया था वो कौन लोग थे,जिन्होंने बिहार में डिजिटल मीडिया को एक नई शुरुआत दी ?

आपके ऐसे तमाम सवालों का जवाब देने के लिए आज बिहार वाइब्स आपके लिए लेकर आया है उनका इंटरव्यू जिन्होंने बिहार में डिजिटल मीडिया को नई ऊंचाई देने का काम किया है।
दरअसल हम बात कर रहे हैं बिहार डिजिटल मीडिया के जाने-माने युवा पत्रकार और वर्तमान ने देश के सबसे बड़े मीडिया हाउस Network18 को अपनी सेवा दे रहे उत्कर्ष सिंह की, जिन्होंने आज से करीब 8 साल पहले बिहार में डिजिटल मीडिया की शुरुआत की और फिर वहां से धीरे-धीरे मीडिया के इस नए माध्यम को आगे बढ़ाने में जुट गए।

तो आइए जानते हैं उत्कर्ष सिंह  से आखिर बिहार में डिजिटल मीडिया को कैसे उन्होंने नया मुकाम दिया।

2012 में शुरू हुई थी डिजिटल मीडिया की यात्रा बिहार वाइब्स से खास बातचीत में उत्कर्ष सिंह ने बताया कि उन्होंने डिजिटल मीडिया को जानना और समझना 2012 से शुरू कर दिया था. हालांकि उस दौरान वो नौकरी अखबार और टीवी में ही कर रहे थे। बिहार के सबसे बड़े अखबार हिंदुस्तान मीडिया वेन्चर्स से अपने कॅरियर की शुरुआत करने के साथ ही उत्कर्ष सिंह की रुचि डिजिटल मीडिया की ओर बढ़ने लगे थी। हालांकि इस दौरान वो डिजिटल के बारे में ज्यादा समझ नहीं रखते थे। उत्कर्ष ने बताया कि मुझे 2012 में डिजिटल मीडिया की थोड़ी बहुत समझ थी। इस बारे में मैं अपने गुरु वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेंद्र नाथ से भी चर्चा की और उन्होंने मुझे कहा- माध्यम कोई भी हो पत्रकारिता के बेसिक का ध्यान रखना और डिजिटल में आगे बढ़ने के लिए उन्होंने मेरा मनोबल बढ़ाया। लेकिन 2013 में जब मुझे सबसे अधिक मानने वाले बॉसेज में से एक बिहार में टीवी पत्रकारिता को एक नई पहचान दिलाने वाले वरिष्ठ पत्रकार श्रीकांत प्रत्यूष ने देश के सबसे बड़े मीडिया संस्थान में शुमार जी मीडिया के साथ जुड़ने का मौका दिया तो मैं डिजिटल मीडिया के अलग-अलग पहलुओं को समझने लगा था | वहां मुझे बिहार से ZMCL के डिजिटल प्लेटफार्म डीएनए इंडिया के काम करने का मौका मिला | मैं 2014 जनवरी से पूरी तरह ज़ी मीडिया के इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए समर्पित हो गया. हालांकि तब राह उतनी आसान नहीं थी | मैं अखबार में काम करने वाला पत्रकार था, लेकिन जब डिजिटल शुरू किया तो फील्ड में लोग बड़े ही अजीब तरीके से रियेक्ट करते थे। उस टाइम या तो अखबार या टीवी को ही अधिक प्राथमिकता मिलती थी, तब इतने ज्यादा डिजिटल प्लेटफार्म भी नहीं थे। कुछ चार-पांच नाम जिन्होंने शुरुआत की थी। फील्ड में जाने पर लोग पूछते थे कि कब चलेगा या छपेगा तो मैं बोलता था लिंक भेज दूंगा हमारा तो डिजिटल प्लेटफॉर्म है न। तब लोग कहते थे आज ये पोर्टल-फोर्टल है। मतलब कोई डिजिटल प्लेटफॉर्म भी ठीक से नहीं समझता न ही कोई इसके फ्यूचर को जानता था.

2014 में ही शुरू किया था अपना न्यूज पोर्टल

उत्कर्ष बताते हैं उन्होंने अपने आईटी क्षेत्र के पुराने सहयोगी रोहित मेहता के साथ अपना न्यूज पोर्टल नई आहट डॉट कॉम शुरू किया था। हालांकि वे पहले से ही जॉब कर रहे थे तो उस समय उन्होंने अपने पोर्टल पर अधिक ध्यान नही दिया। उनका फोकस उनकी जी मीडिया की नौकरी के काम पर रहा लेकिन वहां भी डिजिटल के नए-नए पहलुओं को उत्कर्ष समझते रहें और जब 2014 में लोकसभा चुनाव और 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव को उत्कर्ष ने डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म डीएनए के लिए कवर किया तो उन्हें उसी समय यह एहसास हो गया था कि आने वाले वर्षों में डिजिटल माध्यम से चुनाव लड़े जाएंगे। उत्कर्ष बताते हैं कि जिस तरह से 2015 में बिहार विधान सभा चुनाव परिणाम के दिन हमारे प्लेटफॉर्म को ट्विटर पर फ़ॉलोअर्स/ऑडियन्स मिल रहे थे वह यह बता रहा था कि लोग मोबाइल पर ही सबसे पहले अपडेट चाह रहे थे और इसके लिए सोशल मीडिया की भूमिका भी बहुत महत्वपूर्ण दिख रही थी।

2016 में डिजिटल मीडिया को नई पहचान दिलाने के लिए उत्कर्ष ने किया ये काम
करीब 2.5 साल से भी ज्यादा समय तक जी मीडिया को अपनी सेवा देने के बाद उत्कर्ष ने 2016 के जुलाई-अगस्त में एक नई शुरुआत के लिए अपना कदम आगे बढ़ाया। किन्हीं कारणों से जी मीडिया की नौकरी छोड़ने के बाद उत्कर्ष ने बिहार में डिजिटल मीडिया को एक नई और बड़ी शुरुआत दे रही टीम के साथ कदम बढ़ाया। दरअसल उस समय उत्कर्ष दैनिक जागरण समूह में लंबे समय पर ग्रुप एडिटर की भूमिका निभाने वाले और बिहार और उत्तरप्रदेश के जाने माने पत्रकार शैलेंद्र दीक्षित और बिहार के बड़े क्राइम रिपोर्टर और सीनियर जर्नलिस्ट ज्ञानेश्वर वात्सायन से मिले। उत्कर्ष बताते हैं कि जब मैं इन दोनों से मिला और मुझे जानकारी मिली ये लोग डिजिटल को लेकर कुछ बड़ा LiveCities शुरू करना चाहते हैं तो मैं भी इन वरीय साथियों के साथ जुड़ने से अपने आप को रोक नहीं सका। डिजिटल का पुराना अनुभव होने की वजह से मुझे यहां बड़ी जिम्मेदारी मिली, मेरे इन दोनों बॉसेज ने मुझ पर काफी भरोसा करके Lives Cities की कई जिम्मेदारियां दी लोगों को हायर करने से लेकर कंटेंट चयन तक की छूट मिली। जितने दिन यहां काम किया अपना संस्थान मानकर काम किया क्योंकि कि मैं यहां तब जुड़ा जब ऑफिस में फर्निशिंग का काम चल रहा था और ठीक से स्विच बोर्ड तक नहीं लगे थे। इस दौरान शुरुआत में ही यहां पार्टनर के बीच मनमुटाव हुआ और संस्थान दो भागों में बंट गया लेकिन मैंने संस्थान के उनलोगों के साथ जिनके माध्यम से मैं आया था ईमानदारी से काम करता रहा और सिर्फ 6 महीने में हमारी टीम ने Lives Cities को बिहार का सबसे बड़ा और हिट डिजिटल प्लेटफॉर्म बना दिया था।

 

2017 में देश के सबसे बड़े नेटवर्क के साथ शुरू की डिजिटल की नई पारी

किन्हीं कारणों से Live Cities में एक बड़े पद पर स्वेच्छा से अपनी नौकरी छोड़कर उत्कर्ष ने जुलाई 2017 में देश के सबसे बड़े मीडिया संस्थान नेटवर्क 18 तत्कालीन ई टीवी बिहार झारखंड में डिजिटल प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी संभाली। यहां उन्हें जब न्यूज18 के मैनेजिंग एडिटर के प्रबल प्रताप सिंह औए न्यूज18 बिहार के संपादक प्रभाकर कुमार ने इंटरव्यू लेने के बाद बिहार के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को संभालने की जिम्मेदारी थी तब न्यूज18 बिहार के फेसबुक पेज पर 5000 के करीब फ़ॉलोअर्स और ट्विटर पर भी करीब 20 हजार। लेकिन उत्कर्ष ने यहां भी काम संभालते बहुत कम समय में बिहार में सोशल मीडिया पर न्यूज़18 को टॉप पर ला दिया। न्यूज18 बिहार की बढ़ती स्पीड को देखते हुए ही अन्य क्षेत्रीय चैनल ज़ी बिहार झारखंड और कशिश न्यूज आदि चैनलों ने सोशल मीडिया पर फोकस करना शुरू किया। न्यूज18 बिहार के पेज की सफलता को देखते हुए न्यूज18 झारखंड की जिम्मेदारी भी उत्कर्ष को मिली। उत्कर्ष की मेहनत की वजह आज न्यूज18 बिहार फेसबुक पेज पर 20 लाख से ज्यादा फ़ॉलोअर्स हैं वहीं झारखंड पेज पर भी सिर्फ 6 महीने में 1 लाख से ज्यादा नए फ़ॉलोअर्स बने। इसी तरह ट्विटर और यूट्यूब पर भी न्यूज18 बिहार को काफी संख्या में फ़ॉलोअर्स और सब्स्क्रिबर मिलते गए। इसके साथ ही यहाँ उत्कर्ष ने न्यूज18 हिंदी के कई स्टोरी भी ग्राउंड से फाइल की जिसके लिए उन्हें काफी सराहना मिली। डिजिटल के साथ-साथ उत्कर्ष ने यहां जरूरत के हिसाब से टीवी के लिए भी स्टोरी की, इंटरव्यू किया। यही नहीं यहां हर दिन शाम 5 बजे न्यूज18 बिहार के फेसबुक पेज पर आने वाले शो #News1RoomLive को भी उत्कर्ष ने होस्ट किया जिससे काफी लोगों ने पसंद भी किया।

अब बदनाम भी होने लगी है डिजिटल मीडिया

उत्कर्ष कहते हैं जिस तरह से शुरुवात के दिनों में डिजिटल मीडिया को समझने में लोगों को दिक्कत होती थी, अब वह दिक्कत नहीं है। अब डिजिटल मीडिया को धीरे-धीरे ही सही मान्यता मिलने लगी। अब लोग पहले डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ही खबरे पढ़ते हैं लेकिन इसके साथ कुछ वैसे लोगो के भी इसमें आ जाने से जिन्हें डिजिटल मीडिया या पत्रकारिता की समझ ही नहीं अब यह बदनाम भी होने लगी है। इसकी विश्वनीयता पर कई बार लोग सवाल उठाने लगते हैं। इसलिए जो भी साथी डिजिटल मीडिया के साथ जुड़े हैं या जुड़ने की योजना बना रहे हैं उनसे मैं अपील करता हूँ कि सबसे पहले हिट्स के चक्कर में क्रेडिबिलिटी को दूर न होने दें।

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